सरकारी अस्पतालों में तैनात बॉन्डेड डॉक्टरों ने वेतन विसंगति दूर करने की मांग को लेकर किया प्रदर्शन, निकला कैंडल मार्च

बॉन्डेड डॉक्टरों ने उठाई वेतन समानता की मांग, 1090 चौराहे परकैंडल मार्च
2017 से तय पारिश्रमिक में नहीं हुआ बदलाव, ₹50-65 हजार पाने वाले डॉक्टरों ने लेवल-10 वेतनमान, भत्ते और एरियर की मांग उठाई

लखनऊ, 1 सितंबर। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत अस्पतालों में कार्यरत बॉन्डेड चिकित्सकों ने वेतन विसंगति को लेकर न केवल दिन में स्वास्थ्य महानिदेशक का घेराव किया बल्कि बारिश के बावजूद मंगलवार शाम को 1090 चौराहे पर कैंडल मार्च निकाला, बॉन्डेड डॉक्टर्स की मांग है कि मेडिकल कॉलेजों में उनके साथियों को करीब 1.10 लाख प्रतिमाह मिल रहा है जबकि हम लोगों को 50 हजार से 65 हजार तक दिया जा रहा है, हम लोगों की वेतन विसंगति खत्म की जाए।
- वर्ष 2019 एवं 2020 बैच के करीब 1,800 बॉन्डेड चिकित्सा अधिकारियों ने मंगलवार शाम 6 बजे लखनऊ के 1090 चौराहे पर कैंडल मार्च निकाला।
डॉक्टरों का कहना है कि वे अनिवार्य दो वर्षीय सरकारी सेवा बॉन्ड के तहत ₹10 लाख की बॉन्ड राशि के साथ प्रदेश के विभिन्न राजकीय मेडिकल कॉलेजों, CHC और PHC में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन समान जिम्मेदारियों के बावजूद उनके वेतन में भारी अंतर है।
प्रदर्शन कारी डॉक्टरों की प्रमुख मांग ₹5,400 ग्रेड पे अथवा समकक्ष लेवल-10 वेतनमान के आधार पर वेतन समानता लागू करने की है। उनका कहना है कि राजकीय मेडिकल कॉलेजों में तैनात डॉक्टरों को DA, HRA, NPA समेत अन्य भत्तों के साथ करीब ₹1.10 लाख या उससे अधिक मासिक पारिश्रमिक मिलता है, जबकि CHC/PHC में कार्यरत बॉन्डेड डॉक्टरों को महज ₹50 हजार से ₹65 हजार का निश्चित पारिश्रमिक दिया जा रहा है।

इन डॉक्टरों ने यह भी सवाल उठाया कि उन्हीं CHC/PHC में कार्यरत NRHM मेडिकल ऑफिसरों को करीब ₹1 लाख मासिक पारिश्रमिक मिलता है। ऐसे में एक ही स्वास्थ्य केंद्र पर समान चिकित्सकीय दायित्व निभाने वाले डॉक्टरों के पारिश्रमिक में इतना बड़ा अंतर क्यों है।
नौ साल से वेतन वृद्धि नहीं होने का आरोप
बॉन्डेड डॉक्टरों के मुताबिक उनका वर्तमान निश्चित पारिश्रमिक वर्ष 2017 के सरकारी नोटिस के आधार पर निर्धारित है और करीब नौ वर्षों से इसमें कोई वार्षिक वृद्धि नहीं की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि वे OPD, IPD, इमरजेंसी, नाइट ड्यूटी समेत सभी निर्धारित चिकित्सकीय सेवाएं दे रहे हैं। कई डॉक्टरों की तैनाती दूरस्थ और कठिन क्षेत्रों में है, जहां आवास और सुरक्षा, विशेषकर महिला चिकित्सकों की सुरक्षा, से जुड़ी समस्याएं भी सामने आती हैं।
ये हैं प्रमुख मांगें
₹5,400 ग्रेड पे/समकक्ष लेवल-10 वेतनमान के अनुसार वेतन समानता।
DA, HRA, NPA समेत सभी लागू भत्तों का लाभ।
2018, 2019 और 2020 बैच की पात्र सेवा के लंबित पारिश्रमिक/एरियर का भुगतान।
हर वर्ष वेतन में नियमानुसार वृद्धि।
मांगों पर लिखित और समयबद्ध समाधान।
डॉक्टरों का कहना है कि पिछले करीब एक वर्ष में महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण (DGME), उत्तर प्रदेश को कई बार ज्ञापन और प्रतिनिधित्व दिया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई लिखित और समयबद्ध समाधान नहीं मिला है। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करना नहीं, बल्कि समान कार्य के लिए समान और सम्मानजनक पारिश्रमिक सुनिश्चित कराना है।