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बांस कामगार जातियों का महासम्मेलन लखनऊ में कल

धरकार, बसोड़, वेन बंशी और बांसफोड़ समाज की आर्थिक स्थिति पर होगी चर्चा, बांस की खेती और शिल्प कला बोर्ड की मांग उठेगी

लखनऊ, 28 सितंबर। बांस से जुड़े कामकाज करने वाली धरकार, बसोड़, वेन बंशी, बांसफोड़ समेत अन्य जातियों का महासम्मेलन 30 सितंबर को लखनऊ में आयोजित किया जाएगा। विश्वेश्वरैया सभागार में पूर्वाह्न 11 बजे से होने वाले सम्मेलन में इन समुदायों की आर्थिक स्थिति और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के उपायों पर चर्चा होगी।

विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने बताया कि भारतीय संस्कृति और हिंदू परंपरा में बांस को पवित्र माना जाता है। उन्होंने कहा कि बांस से जुड़े समुदायों का पारंपरिक रोजगार अब बांस की उपलब्धता में कमी, कच्चे माल की समस्या और प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल से प्रभावित हुआ है। इससे इन समुदायों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हुआ है और बड़ी संख्या में लोग सड़क किनारे झोपड़ियां बनाकर रहने को मजबूर हैं।

डॉ. निर्मल के मुताबिक इन समुदायों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए बांस की व्यापक खेती को बढ़ावा देने, बांस शिल्प कला बोर्ड के गठन और बांस की खेती के लिए संबंधित वर्गों को पट्टे पर जमीन उपलब्ध कराने की जरूरत है।

सम्मेलन में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, मंत्री स्वतंत्र देव सिंह व जयवीर सिंह तथा असम राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ बांसफोड़ प्रमुख रूप से संबोधित करेंगे।

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