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यूपीआई सरचार्ज को लेकर सियासत तेज, कांग्रेस के विरोध पर मृत्युंजय दीक्षित ने उठाए सवाल

2,000 रुपये से अधिक के कारोबारी यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर को लेकर विपक्ष पर हमलावर हुए लेखक

लखनऊ। 2,000 रुपये से अधिक के कारोबारी यूपीआई भुगतान पर 15 अक्टूबर 2026 से 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाए जाने के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। लेखक मृत्युंजय दीक्षित ने अपने लेख में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों के विरोध पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाया जा रहा है।

दीक्षित का कहना है कि प्रस्तावित एमडीआर केवल कारोबारियों के लिए है और इसका बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डालने की अनुमति नहीं होगी। उनके मुताबिक 2,000 रुपये तक के यूपीआई भुगतान एमडीआर से बाहर रहेंगे। छोटे कारोबारियों, रेहड़ी-पटरी वालों तथा फल-सब्जी विक्रेताओं को भी अतिरिक्त शुल्क से बाहर रखने का दावा लेख में किया गया है।

96 प्रतिशत यूपीआई भुगतान एमडीआर से बाहर होने का दावा

लेख में कहा गया है कि प्रस्तावित व्यवस्था के बावजूद 96 प्रतिशत यूपीआई भुगतान एमडीआर के दायरे से बाहर रहेंगे। किराना, दवाएं, रेस्तरां, कैब और रोजमर्रा की छोटी खरीदारी जैसे अधिकांश भुगतान पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों के लिए भी अलग राहत का उल्लेख किया गया है।

कांग्रेस के रुख पर उठाए सवाल

दीक्षित ने कांग्रेस के विरोध को लेकर संसदीय समिति में शामिल पार्टी के सांसदों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि वित्तीय मामलों से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति में शामिल कांग्रेस सांसदों ने यूपीआई पर एमडीआर से संबंधित प्रस्ताव का समर्थन किया था। लेख में राहुल गांधी से इस विरोधाभास पर स्पष्टीकरण मांगने की बात कही गई है।

यूपीआई के खर्च और राजस्व मॉडल का तर्क

लेखक के अनुसार यूपीआई देश का प्रमुख डिजिटल भुगतान प्लेटफार्म बन चुका है और इसके संचालन में सर्वर, साइबर सुरक्षा तथा तकनीकी रखरखाव पर लगातार खर्च होता है। उनका तर्क है कि बड़े कारोबारी लेनदेन पर सीमित शुल्क से इस डिजिटल भुगतान ढांचे के लिए स्थायी राजस्व मॉडल तैयार हो सकता है।

लेखक ने यह भी दावा किया गया है कि प्रस्तावित शुल्क का असर उपभोक्ता के यूपीआई भुगतान अनुभव पर नहीं पड़ेगा और शुल्क की वसूली ग्राहक से करने पर संबंधित व्यापारी के खिलाफ शिकायत की जा सकती है। दीक्षित ने विपक्ष के विरोध को राजनीतिक मुद्दा बताते हुए कहा है कि यूपीआई का इस्तेमाल आम जनता पहले की तरह करती रहेगी।

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