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प्राइमरी स्कूल के 6,7 और 8 की वार्षिक परीक्षा में पर्यावरण विषय का एक ही पेपर

6,7 और 8 में एक ही पेपर से करा दी परीक्षा
प्राइमरी स्कूल की वार्षिक परीक्षा बनी मजाक, दोबारा एक पेपर से करा दी तीनों क्लास की परीक्षा
जबकि किताब में वार्षिक, अर्ध वार्षिक और दो सत्र परीक्षा का अलग अलग दिया है पाठ्यक्रम
-शिक्षकों में आक्रोश जांच की उठाई मांग
लखनऊ ।
बेसिक शिक्षा के अधिकारियों ने प्राइमरी स्कूल में चल रही वार्षिक परीक्षाओं को मजाक बना दिया है। शुक्रवार को दोबारा पर्यावरण विषय के एक ही प्रश्न पत्र से कक्षा 6,7 और 8 के विद्यार्थियों की परीक्षा करा दी। 50 अंक के पूर्णांक वाले पेपर में एक ही तरह के सारे सवाल तीनों क्लास में पूछे गए हैं। जबकि किताब में तीनों कक्षाओं का अलग अलग पाठ्यक्रम दिया। इसके बावजूद प्रश्न पत्र बनाने वाले अधिकारियों ने तीनों कक्षाओं का एक ही प्रश्न पत्र बना दिया।

शिक्षकों ने प्रश्न पत्र बच्चों को देने बाद मिलान में ये गड़बड़ी पकड़ी। शिक्षकों का कहना है कि एक समान पेपर से बच्चों का आकलन काफी मुश्किल होता है। जबकि सीतापुर समेत दूसरे जिलों में तीनों क्लास में अलग अलग प्रश्न पत्र से परीक्षा हुई है।


बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़
शिक्षकों का कहना है कि पर्यावरण विषय की किताब बेशक तीनों क्लास में एक ही चलती है, लेकिन 6,7 और 8 का पाठ्यक्रम अलग-अलग दिया हुआ है। पूरे शैक्षिक सत्र में होने वाली दो सत्र परीक्षाएं, अर्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षा के अनुसार किताब में अलग-अलग पाठ्यक्रम का विभाजन दिया है। शिक्षकों ने इसी के अनुसार बच्चों को पढ़ाया गया है, लेकिन पेपर एक ही बना दिया। ऐसे में ये बच्चों की पढ़ाई से खिलवाड़ किया जा रहा है। इससे बच्चों की पढ़ाई का आकलन करना काफी मुश्किल होगा। शुक्रवार को परीक्षाएं खत्म हो गई, लेकिन 5 वीं में गणित और सामाजिक विषय व कक्षा आठ में गणित और विज्ञान विषय की 17 मार्च को स्थगित हुई परीक्षा 24 मार्च को होगी।

शिक्षक बोले-मामले की जांच हो
शिक्षकों का कहना है कि लखनऊ में वार्षिक परीक्षा के पहले दिन खेल और स्वास्थ्य विषय के एक ही प्रश्न पत्र से 6,7 और 8 क्लास की परीक्षा हुई थी। अब शुक्रवार को दोबारा से पर्यावरण विषय में इन्हीं तीनों क्लास में एक ही पेपर से परीक्षा करा दी। शिक्षकों ने प्रश्न पत्र बनाने वाले अधिकारियों पर सवाल उठाया है कि एक बार गलती होने पर सबक लेने के बजाय दोबारा फिर से वही गलती की। प्रदेश भर में प्राइमरी स्कूलों के प्रश्न पत्र हर डायट प्रचार्य के निर्देशन में गठित कमेटी बनाती हैं। प्रश्न पत्र बनाने से लेकर छपने के बाद इनके जांच का अधिकारियों का होता है, लेकिन अधिकारी प्रश्न पत्रों की जांच किये बिना ही स्कूलों को भेज दिए हैं। शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों ने सचिव से मांग की है इस मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करें।

वर्जन


किताब में कुछ मौलिक चीजें समान होती हैं, लेकिन एक जैसा पेपर नहीं बनाया जाना चाहिए। प्रश्न पत्र डायट से बनाए जाते हैं । इसका पता कराता हूं। ये गलती कैसे हुई है?
सुरेन्द्र तिवारी, सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद

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