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उपेक्षा का दंश झेल रही नर्सेज़ ने बनायी महत्वपूर्ण रणनीति

बीच में शार्ली भंडारी , अशोक कुमार और पीछे सत्येंद्र कुमार

लखनऊ । अपनी माँगों पर कई बार शासन से सहमति होने के बाद भी शासनादेश जारी न होने से प्रदेशभर की नर्सेज अधिकारियों से नाराज हैं । मागों के पूरा न होने से आक्रोशित प्रदेश भर के ज़िलों से आये राजकीय नर्सेज़ संघ के पदाधिकारियों ने मंगलवार को बलरामपुर अस्पताल में बैठक कर आगे की रणनीति तैयार की है! नर्सेज़ के प्रति सरकार के उदासीन रवैये पर आक्रोश जताते हुये शीघ्र ही बड़े आंदोलन हेतु सहमति बन गई है।

राजकीय नर्सेज़ संघ की प्रदेश अध्यक्ष शर्ली भंडारी ने बताया प्रदेश में नर्सेज़ अपने घर परिवार से दूर व्यक्तिगत परेशानियों से परे पूरे मनोयोग से मरीज़ों की सेवा में जुटी हैं विगत कई वर्षों से शासन से विनम्रता पूर्वक अपनी माँगों को पूर्ण होने की उम्मीद लगाये बैठी है पर शासन की तरफ़ से कोई भी सहमति न बनने से सभी में आक्रोश व्याप्त है ।

राजकीय नर्सेज़ संघ के प्रदेश महामंत्री अशोक कुमार ने बताया कि नर्सेज़ की ग्रह जनपद तैनाती पर शाशन स्तर पर सहमति बनने के बाद भी अभी तक शासनादेश नहीं जारी हुआ है जिसके कारण नर्सेज़ अभी भी अपने घर-परिवार से सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रही हैं

नर्सेज़ की प्रमुख माँगों जैसे

1-गृह जनपद तैनाती

2-पदनाम परिवर्तन एंव पदोन्नति

3- नर्सिंग एलाउंस/ बोर्डिंग एलाउंस, यूनिफॉर्म एलाउंस, वॉशिंग और शिक्षा भत्ता

4- नर्सिंग काउंसिल में नर्स रजिस्टर की नियुक्ति नर्सिंग संवर्ग से किये जाने।

5- नर्सिंग संवर्ग का पुनर्गठन किये जाने ।

6-महानिदेशालय स्तर पर पदों को तत्काल भरे जाने

7- राष्ट्रपति पुरस्कार पाने वाली नर्सेज को अतिरिक्त 2 वर्ष का सेवा विस्तार दिया जाने ।

8-नर्सेज को पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग की भर्ती एमएससी नर्सिंग करने की भी अनुमति भी दी जाए जो लोग बीएससी करके सेवा मे आते हैं।

9- संविदा आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्य करने वाले नर्सिंग संवर्ग को नियमित किया जाए एवं आउटसोर्स संविदा खत्म किया जाए।

10- पूर्व की भांति नवनिर्मित मेडिकल कॉलेज में नर्सेज के पदों पर पूर्व की भांति नर्सेज को बरकरार रखा जाए जैसा अन्य मेडिकल कॉलेज मे व्यवस्था है आदि के पूरी न होने पर प्रदेश की नर्सेज़ बड़े आंदोलन की ओर अग्रसर होंगी।

बैठक में कार्यालय सचिव सत्येन्द्र कुमार ने बताया सरकार चिकित्सा शिक्षा और चिकित्सा स्वास्थ्य की नर्सेज़ के साथ दोहरा मापदंड अपना रही है एक ओर चिक़ित्सा शिक्षा की नर्सेज़ को समय से प्रमोशन,नर्सिंग केयर भत्ता,न्यूज़ पेपर भत्ता, टेलीफोन व इंटरनेट भत्ते सहित कई अन्य सुविधाएँ तो दे रही है तो दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग की नर्सेज़ को इन सबसे
वंचित रख रही है जबकि सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं को समाज के अंतिम पायदान तक पहुँचाने में इन्ही स्वास्थ्य विभाग की नर्सेज़ का अहम योगदान रहता है जो सामुदायिक, प्राथमिक व ग्रामीण केंद्रों पर अपनी सेवायें दे रही हैं!

शामिल हुई जिलों से आई नर्सेज

प्रदेश सभी ज़िलों से आये नर्सेज़ पदाधिकारियों में घनश्याम वर्मा, बबीता गोस्वामी, राजेंद्र शुक्ला, राधारानी वर्मा, लालजी त्रिपाठी, रामगोपाल, मीना वर्मा, गीतांशु सिंह , स्मिता सिंह आदि ने नर्सेज़ के प्रति सरकार के उदासीन रवैये पर आक्रोश जताते हुये शीघ्र ही बड़े आंदोलन हेतु सहमति व्यक्त की गई!

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