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पूंजी वितरण की समस्या का समाधान है सहकारिता : मनोज कांत

सहकार भारती का दो दिवसीय अभ्यास वर्ग सम्पन्न, स्वावलम्बन और उद्यमिता पर जोर

लखनऊ। राष्ट्रधर्म के निदेशक मनोज कांत ने कहा कि सबको एक साथ रखना, साथ रहना, साथ कार्य करना और सबको अपना मानकर चलना ही सहकारिता है। पूंजी के न्यायसंगत वितरण की समस्या का समाधान अब तक नहीं मिल सका है, लेकिन सहकारिता इस समस्या का प्रभावी समाधान बन सकती है। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से समाज में स्वावलम्बन बढ़ेगा और नए उद्यम खड़े होंगे।

वह सोमवार को एसआर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, सीतापुर रोड में आयोजित सहकार भारती के दो दिवसीय प्रदेश अभ्यास वर्ग के समापन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। मनोज कांत ने कहा कि बेरोजगारी आज की समस्या नहीं है। पहले हमारे इतिहास और शास्त्रों में ‘बेरोजगार’ जैसा शब्द देखने को नहीं मिलता था। आधुनिकीकरण के साथ हमारे शब्द और व्यवहार भी बदले हैं। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति, भाषा और व्यवहार को अपनाने से समाज की अपनी व्यवस्था प्रभावित हुई है। ऐसे समय में सहकारिता का महत्व और बढ़ जाता है।

उन्होंने कहा कि सहकारिता से समाज में प्राचीन संस्कृति, अनुशासन और भारतीयता का भाव कायम रहेगा। इसके माध्यम से नए उद्यम स्थापित करने की योजनाएं बनेंगी और उद्यम लगेंगे तो समाज आर्थिक रूप से स्वावलम्बी बनेगा। भविष्य में सहकारिता का कोई विकल्प नहीं है। इससे जुड़ने वाला व्यक्ति समूह के अनुशासन और उसकी गरिमा को समझता है और धीरे-धीरे अधिक अनुशासित होता जाता है।

अभ्यास वर्ग में सहकार भारती के प्रदेश महामंत्री अरविंद दुबे ने कहा कि सभी को सहकारिता की भावना के साथ चलने, कार्य करने और विमर्श करने की आवश्यकता है। इससे परस्पर सहयोग, आत्मीयता और कार्यक्षमता बढ़ती है। उन्होंने संगठन के विभिन्न प्रकोष्ठों की कार्यशैली और सहकारी समितियों के गठन पर जोर दिया।

सहकार भारती के राष्ट्रीय प्रमुख पैक्स प्रकोष्ठ राजदत्त पाण्डेय ने सहकारिता के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में मानव जीवन के विकास के साथ सहकारिता का पुराना संबंध है। उन्होंने बताया कि 1904 में देश में पहला सहकारिता कानून बना था। सहकारिता में सभी सदस्यों को समान अधिकार मिलता है, जबकि कारपोरेट जगत में पूंजी के अनुपात में मताधिकार निर्धारित होता है। उन्होंने कहा कि संगठन को मजबूत बनाने में प्रकोष्ठों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

प्रदेश सम्पर्क प्रमुख अशोक कुमार शुक्ला ने ‘स्वावलम्बी भारत अभियान’ विषय पर संबोधित करते हुए छोटे उद्योग स्थापित करने के लिए प्रशिक्षण लेने और सरकारी योजनाओं से जुड़ने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि गांव-गांव युवाओं के साथ महिलाएं भी स्व-उद्यम स्थापित करेंगी।

अभ्यास वर्ग में सहकारिता का इतिहास, प्रकोष्ठ कार्य, सहकारी समितियों का गठन और संगठनात्मक विषयों पर विभिन्न सत्र आयोजित हुए। विभाग संयोजक रामकुमार दीक्षित ने संगठनात्मक वृत्त प्रस्तुत किया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ विभाग प्रमुख रामकुमार दीक्षित ने कार्यक्रम का समापन किया।

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