घुटने का इलाज उपलब्ध है मानकर घुटने से लापरवाही न करें : प्रो.आशीष कुमार

लोहिया संस्थान में घुटना बचाव विषयक कार्यशाला संपन्न
लखनऊ। कभी-कभी चलने के दौरान घुटने में कट-कट की आवाज आती है या अचानक लॉक हो जाता है, मतलब दर्द के साथ जाम हो जाता है। मगर कुछ देर बाद ही ठीक हो जाता है यह सामान्य स्थिति है। लेकिन अगर यही प्रक्रिया छह सप्ताह से ज्यादा की हो जाये तो, समस्या को नजर अंदाज नही करना चाहिये, तुरन्त विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श ले क्योंकि संभवता घुटने की कार्टलेज कम पड़ रहा होगा और घुटना घिसना शुरु हो सकता है। इसलिए घुटनों की कोई भी छोटी समस्या को भी नजरअंदाज नही करना चाहिये, क्योंकि आपकी लापरवाही घुटना बदलने की स्थिति में पहुंचा सकती है। प्रयास करे कि घुटना प्रत्यारोपण की स्थिति में न पहुंचे। यह जानकारी शनिवार को लोहिया संस्थान में एक दिवसीय ‘नी प्रीजिर्वेशन’विषयक कार्यशाला में केजीएमयू के प्रो.आशीष कुमार ने दी। कार्यशाला का उद्घाटन संस्थान की निदेशक डॉ.सोनिया नित्यानंद और केजीएमयू के प्रतिकुलपति प्रो.विनीत शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर किया।

कृत्रिम घुटना पहले जैसा व्यवहारिक नही रहता है
लोहिया संस्थान के सभागार में आर्थोपैडिक विभाग द्वारा AAUP (एसोसिएशन ऑफ आर्थ्रोस्कोपी सोसाइटी ऑफ उत्तर प्रदेश), ASGI (आर्थोस्कोपी स्टडी ग्रुप ऑफ इंडिया) और LOS (लखनऊ ऑर्थोपेडिक सोसाइटी) के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में लाइव सर्जरी कर घुटना प्रत्यारोपण के स्थिति से बचने के पूर्व के लक्षण व इलाज पर चर्चा हुई। कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि, आर्थोपैडिक सर्जन व स्पोर्ट मेडिसिन यूनिट हेड प्रो.आशीष कुमार ने बताया कि वर्तमान में घुटना प्रत्यारोपण कराना सामान्य इलाज हो चुका है। मगर प्रयास करना चाहिये कि प्रत्यारोपण कराना ही न पडेÞ अगर जरूरत पड़े तो 55-60 साल की उम्र के बाद ही कराना पडेÞ। क्योंकि कृत्रिम घुटना, प्राकृतिक जोड़ पर प्रत्योरोपित की जाती हैं, बहुत कुछ पहले जैसा व्यवहारिक नही रहता है, जिसकी वजह से वर्किग व्यक्ति को दिक्कत हो सकती है और संभवता दुबारा प्रत्यारोपण की भी नौबत आ सकती है।

एक घुटना खराब होने से दूसरा भी खराब होने लगता है
कार्यशाला में मुख्य अतिथि केजीएमयू के प्रतिकुलपति व आर्थोपैडिक विभागाध्यक्ष प्रो.विनीत शर्मा ने कहा, एक पैर के घुटने में दिक्कत है तो तुरन्त इलाज कराएं , नहीं तो वह घुटना खराब होने के साथ ही दूसरा भी खराब होने लगता है। क्योंकि एक घुटने में समस्या आने पर शरीर का दबाव दूसरे घुटने पर पड़ने लगता है और ज्यादा दबाव पड़ने पर समय से पहले खराब हो जाता है। इसलिए अगर घुटने की समस्याओं के लक्षणों को नजर अंदाज न करे, जितनी जल्दी लक्षणों का इलाज लेकर घुटनों को बचाया जा सकता है, पूर्णतया ठीक हो सकते हैं। कार्यशाला के आयोजन सचिव लोहिया के आर्थोपैडिक विशेषज्ञ डॉ.सचिन अवस्थी ने बताया कि घुटनों में कई दिक्कतें होती हैं,इलाज भी है। प्रत्यारोपण अंतिम विकल्प होता है। कार्यशाला में लाइव सर्जरी से प्रत्यारोपण के दौरान बारिकिया भी ि