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यदि संघ उनसे पद छोड़ने को कहेगा, तो वे तुरंत छोड़ देंगे : मोहन भागवत

mohan bhagwat

लखनऊ । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा रविवार को स्वयं सेवकों के बीच व्यक्त कथन “कि यदि संघ उनसे पद छोड़ने को कहेगा, तो वे तुरंत ऐसा करेंगे”। आमतौर पर 75 साल की उम्र के बाद किसी पद पर नहीं रहने की परंपरा की बात कही जाती है।

संघ प्रमुख भागवत के रविवार के कथन से राइट विंग में हलचल बढ़ा दी है और पर्याप्त संकेत मिल रहे हैं कि आगामी समय में संघ में गहमागहमी और बढ़ेगी। मुंबई के कार्यक्रम में RSS प्रमुख ने कहा कि सरसंघचालक बनने के लिए क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है। जो हिंदू संगठन के लिए काम करता है वही सरसंघचालक RSS प्रमुख बनता है।

RSS के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम के दौरान भागवत ने कहा कि वीर सावरकर को भारत रत्न दिया गया तो इससे पुरस्कार की गरिमा और बढ़ेगी, सावरकर के लिए भारतीय नागरिक श्रेष्ठ सम्मान मिलने की बात कहकर भागवत ने आरएसएस के रुख के कड़े होने के संकेत दिए हैं जो मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के सहयोगी घटक दलों में हलचल बढ़ाने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।

जाने संघ प्रमुख की जीवन यात्रा

संघ प्रमुख मोहन भागवत चंद्रपुर, महाराष्ट्र में जन्मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छठे सरसंघचालक हैं, जो 2009 से यह पद संभाल रहे हैं। वेटनरी चिकित्सा शिक्षा प्राप्त भागवत पूर्णकालिक प्रचारक बने, और उन्होंने संघ के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दिया है जो वर्तमान में सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए इस उम्र में सक्रियता उत्साह से राष्ट्र कार्य में लगे हुए हैं।

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